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जून महीने में हुई कम बारिश का दिख रहा असर, खरीफ फसलो की बुवाई हो रही प्रभावित

बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित.

Image Credit source: TV9 (फाइल फोटो)

Kharif Crops: देश में इस बार खरीफ फसलों की बुवाई काफी प्रभावित हुई है. बेहतर मॉनसून के पूर्वानुमान के बावजूद जून के महीने में अच्छी बारिश नहीं हुई है. कम बारिश के कारण दलहन, तिलहन और धान की खेती का क्षेत्रफल घटा है, पर गन्नें की खेती का रकबा बढ़ा है.

देश में इस बार सामान्य मॉनसून (Monsoon) के पूर्वानुमान के बाद भी बारिश की कमी बनी हुई है. इसके चलते खरीफ फसलों (Kharif Crops) की बुवाई पर इसका खासा असर पड़ा है. खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है. केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में पिछले साल इस अवधी तक बुवाई का क्षेत्रफल 184.44 लाख हेक्टेयर के की तुलना में इस साल अब तक 140.52 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो पाई है. बुवाई में और भी देरी की संभावन है क्योंकि जून के अंत तक दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर चरण में रहने की संभावना है इसके कारण इस साल की शेष खरीफ बुवाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है. देश के छह राज्य ऐसे हैं जहां पर बारिश में 31 फीसदी तक की कमी हुई है. इनमें गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा शामिल है.

इंडियन एक्रप्रेस के मुताबिक भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पुणे की वैज्ञानिक मेधा खोले ने कहा कि कम से कम जून के अंत तक मध्य और आंतरिक प्रायद्वीपीय भारत में बारिश में प्रगति होने की कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है. मराठवाड़ा को छोड़कर, मध्य भारत के अधिकांश क्षेत्र इस मौसम में अब तक कम वर्षा की कमी का सामना कर रहे हैं. इसका मतलब यह हो सकता है कि जून में कम बारिश के कारण देश में खरीफ फसलों के बुवाई का क्षेत्रफल घट सकता है.

गन्ने की खेती में आई बढ़ोतरी

खरीफ फसलों की बात करें तो तिलहन की फसल सबसे अधिक प्रभावित हुई है. इसमें 47.45 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है. पिछले साल के 22.41 लाख हेक्टेयर से केवल 11.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र तिलहन के अंतर्गत आया है. हालांकि सभी फसलों में गिरावट के बीच सिर्फ गन्ना की फसल में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है. इस साल देश के किसानों ने 50.74 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती की है. जबकि पिछले साल 50.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की गयी थी.

चिंता में हैं मूंग और उड़द के किसान

सोयाबीन जैसे तिलहन और अरहर जैसी दलहन की बुआई अभी खत्म नहीं हुई है, वहीं मूंग और उड़द के उत्पादक चिंतित हैं. सोयाबीन, कपास, अरहर और जुलाई के अंत तक बोई जा सकने वाली अन्य फसलों की तुलना में इन दोनों फसलों की बुवाई जून के अंत तक बंद हो जाती है. कई राज्यों में किसान अभी भी बुवाई में तेजी लाने के लिए पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं.

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झारखंड में भी प्रभावित हुई खेती

झारखंड की बात करें तो यहां भी कम बारिश का असर दिखाई दे रहा है. खेत में पर्याप्त नमीं नहीं होने के कारण किसान अभी तक धान का बीतड़ा भी नहीं डाल पाए हैं. राज्य में 41 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गयी है. जबकि राज्य के कुछ ऐसे जिले हैं जहां पर 60 फीसदी से कम बारिश दर्ज की गयी है. इसके कारण धान की बुवाई पर इसका असर पड़ रहा है.

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